रंगीला फागुन [ आधार छंद – सरसी ] कर्नल प्रवीण शंकर त्रिपाठी ,नोयडा /...
हिंदी कविता
अनुक्रमणिका कविताएं / ग़ज़ल : पावस रंग भरने लगे है तय करेंगे हम लो...
पावस रंग भरने लगे है… पावस रंग भरने लगी है,भग्नता हरने लगी है।थार की...
तय करेंगे हम जब कभी रुक जायेगा दिन–रात का ये क्रम।जी रहे या मर...
लो ! बसंत आ गया खेतों में फूली है सरसोंचाहत मन में बो रहीं।गीत...
पुनः लौट कर आएंगे ये जीवन ये दर्शन नित जो, वहाँ कहाँ हम पायेंगे।इस...
रंगीला फागुन [ आधार छंद – सरसी ] फागुन का जब लगे महीना,...
आवेग और उत्साह आवेग है अंधेरा, जो धकेलता है अंधकार में, उत्साह है सूरज...
उत्कर्ष दंभ का दमन होता चमचमाती चमक में आंखें खोतारावण हो या ध्रतराष्ट्र फिर...
छुड़ाये कैसे इनसे जान आस्तीन में नाग छिपे हैंकैसे हो पहचान छुड़ाएं कैसे इनसे...

